अमित शाह एंड द मार्च ऑफ बीजेपी – राजनीतिक संस्कृति के कई अध्याय

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| by दीपाली अग्रवाल
अगर भारतीय राजनीति के करिश्माई व्यक्तित्वों की चर्चा की जाए, तो वह अमित शाह के बिना पूरी नहीं हो सकती। वे भाजपा अध्यक्ष के रूप में अपने सफल कार्यकाल के बाद अब देश के गृहमंत्री बन चुके हैं। अपनी राजनीतिक गतिविधियों के कारण अमित शाह मीडिया की चर्चा में तो खूब रहते हैं और उनके विषय में अनेक लोग जानना भी चाहते हैं, मगर उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन के विषय में जानकारी प्राप्त करने का कोई ठोस और प्रामाणिक स्रोत अब तक उपलब्ध नहीं था। फुटकर रूप से ही जानकारियां मिलती थीं। ऐसे में, लेखकद्वय अनिर्बान गांगुली और शिवानन्द द्विवेदी की पुस्तक ‘अमित शाह एंड द मार्च ऑफ बीजेपी’ इस कमी को काफी हद तक पूरा करती है।

इस पुस्तक में भाजपा की विकास-यात्रा के साथ-साथ एक सामान्य कार्यकर्ता से भाजपा अध्यक्ष तक अमित शाह के राजनीतिक सफर का भी तथ्यपरक ढंग से सविस्तार वर्णन किया गया है। साथ ही, उनके निजी जीवन के जाने-अनजाने पहलुओं पर भी नजर डाली गई है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस किताब में एक तरफ भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले राजनेता अमित शाह हैं, तो दूसरी तरफ अपनी नन्ही-सी पोती रुद्री के साथ खेलते हुए सब कुछ भूल जाने वाले दादा अमित शाह भी हैं। यह किताब भाजपा अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के राजनीतिक कार्यकलापों, नवाचारों व प्रयोगों पर गहराई तक जाकर चर्चा करती है

एक कालखंड में जब, भाजपा में प्रवास की ऐतिहासिक परंपरा शिथिल पड़ने लगी थी, तब अमित शाह ने किस प्रकार न केवल इसको पुनर्जीवित किया बल्कि उसके जरिये देश भर में संगठन की नींव को मजबूती भी दी, किताब में इसका किसी कहानी की तरह बड़ा ही रोचक वर्णन मिलता है। इसी तरह सदस्यता अभियान, पन्ना प्रमुख, बूथ प्रमुख, विस्तारक अभियान जैसी गतिविधियों के जरिये भी संगठन को जन-जन तक पहुंचाने में अमित शाह की सफल रणनीति को हम इस किताब के जरिये समझ सकते हैं। अमित शाह के निजी व्यक्तित्व से संबंधित अनेक नई बातें भी यह किताब बताती है। जैसे, मीडिया में शाह की छवि बेहद सख्त और गुस्सैल स्वभाव वाले राजनेता के रूप में पेश की जाती है, जबकि वास्तविकता ऐसी नहीं है।

शाह अपने साथ कार्य करने वाले लोगों के साथ किस प्रकार हंसी-मजाक आदि के जरिये दोस्ताना माहौल बनाकर रखते हैं, इसे कई प्रसंगों के द्वारा बहुत सुंदर ढंग से सामने लाया गया है। एक प्रसंग में सहयोगियों के साथ काम के दौरान पकौड़े खाते हुए शाह कहते हैं कि जिस पार्टी के नेता ज्यादा बेसन खाएंगे, वही पार्टी जीतेगी और पूरा माहौल ठहाकों से भर जाता है। को उकेरती पुस्तक यह भी बताती है कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का अध्यक्ष अध्ययन की संस्कृति को पार्टी में बढाने के लिए किस प्रकार के प्रयास करता है।


किताब- अमित शाह एंड द मार्च ऑफ बीजेपी
लेखक- अनिर्बान गांगुली, शिवानन्द द्विवेदी
प्रकाशक – ब्लूम्सबरी, दिल्ली
मूल्य- 399 रुपये

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